छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला : राजस्व रिकॉर्ड में ‘चमार’ या ‘मोची’ दर्ज होने पर भी मिलेगा ‘रोहिदास’ जाति प्रमाण पत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने अनुसूचित जाति वर्ग के नागरिकों को एक बड़ी राहत प्रदान करते हुए जाति प्रमाणपत्र को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के पूर्वजों के राजस्व अभिलेखों (रेवेन्यू रिकॉर्ड) में ‘चमार’ या ‘मोची’ दर्ज है, तब भी निर्धारित प्रक्रिया और जांच के आधार पर उन्हें ‘रोहिदास’ जाति का प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा।

छत्तीसगढ़ शासन ने  इस आदेश की प्रति राज्य के समस्त शासन के विभागों, राजस्व मंडल बिलासपुर, समस्त संभागीय आयुक्तों, विभागाध्यक्षों और सभी जिला कलेक्टरों को भेजकर इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के उन हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जो कागजी अभिलेखों की तकनीकी विसंगतियों के कारण अपने प्रमाण पत्र नहीं बनवा पा रहे थे।

क्या थी मुख्य प्रशासनिक समस्या
सरकार के संज्ञान में यह बात आई थी कि संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अधिसूचित अनुसूचित जाति की सूची के सरल क्रमांक 14 पर ‘चमार’  ‘मोची’, ‘रोहिदास’ समेत कई जातियां एक ही समूह में शामिल हैं। राज्य के कतिपय जिलों में ‘रोहिदास’ जाति से ताल्लुक रखने वाले लोगों के पुराने राजस्व अभिलेखों में ‘चमार’ या ‘मोची’ दर्ज होने के कारण उन्हें ‘रोहिदास’ जाति का नया प्रमाण पत्र प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

संवैधानिक अधिकारों पर नहीं पड़ेगा असर
सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि चमार, मोची और रोहिदास -सभी जातियां केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अधिसूचित अनुसूचित जाति की सूची में शामिल हैं। चूंकि ये सभी एक ही अधिसूचित समूह का हिस्सा हैं, इसलिए दस्तावेजों में नाम के अंतर से इनके संवैधानिक अधिकारों और प्रावधानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

क्या होगी प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया?
शासन द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, यदि कोई आवेदक ‘रोहिदास’ जाति का प्रमाण पत्र मांगता है और उसके पूर्वजों के राजस्व रिकॉर्ड में ‘चमार’ या ‘मोची दर्ज है, तो सक्षम अधिकारी इसकी विधिवत जांच करेंगे। अधिकारियों को 1 अगस्त 1996 को जारी सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र के परिशिष्ट की कंडिका 6 में उल्लिखित जांच के आधार बिंदुओं के तहत परीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। यदि जांच में यह पुष्ट हो जाता है कि संबंधित अभ्यर्थी वास्तव में ‘रोहिदास’ जाति से ही है, तो उन्हें बिना किसी बाधा के ‘रोहिदास’ जाति का प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।

अब कोई कठिनाई नहीं होगी
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सनम जांगड़े का कहना है कि यह राज्य सरकार की एक बहुत अच्छी पहल है। जो लोग चमार या मोची लिखते हैं उन्हें रोहिदास जाति का जाति प्रमाण पत्र मिलने में कठिनाई होती है जो अब नहीं होगी। सरकार एवं मुख्यमंत्री की यह पहल स्वागत योग्य है।

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