जांजगीर-चांपा भाजपा में पावर शिफ्ट? प्रेसवार्ता में जिलाध्यक्ष बैकफुट पर, जिला पंचायत अध्यक्ष सत्यलता मिरी बनीं मुख्य चेहरा

जांजगीर-चांपा। कांग्रेस के कलेक्टोरेट घेराव के बाद भाजपा ने चुनाव आयोग के संयुक्त बयान के सहारे जोरदार पलटवार की रणनीति बनाई। प्रेसवार्ता का विषय भी धारदार रखा गया – “चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से कांग्रेस एवं विपक्षी इंडी गठबंधन के झूठ का पर्दाफाश”। लेकिन इस प्रेसवार्ता ने कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के अंदर की सियासत को गरमा दिया है।
चर्चा इस बात की नहीं है कि कांग्रेस को क्या जवाब दिया गया, चर्चा इस बात की है कि जवाब किसने दिया।
जिला मीडिया प्रभारी की ओर से जारी सूचना में तीन नाम थे – जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सत्यलता मिरी, जिलाध्यक्ष अम्बेश जांगड़े और नगर पालिका अध्यक्ष रेखा गढ़वाल। प्रोटोकॉल के हिसाब से संगठन का पक्ष जिलाध्यक्ष को रखना था। लेकिन मंच पर सीन उल्टा दिखा।
प्रेसवार्ता में मुख्य वक्ता के रूप में श्रीमती सत्यलता मिरी ने मोर्चा संभाला। पत्रकारों के हर तीखे सवाल – चाहे SIR हो, फॉर्म-6 हो या कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र का विवाद – उनका जवाब मिरी ने बेबाकी से दिया। चुनाव आयोग के 26 सितंबर के सर्वसम्मति वाले बयान, सुप्रीम कोर्ट की वैधता और कांग्रेस की ‘भ्रम की राजनीति’ पर उन्होंने तथ्यों के साथ प्रहार किया।
इस दौरान जिलाध्यक्ष अम्बेश जांगड़े मंच पर मौजूद तो रहे, लेकिन मुख्य वक्ता की भूमिका में नहीं दिखे। यहीं से राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं।
सवाल तीन हैं –
पहला – क्या जिलाध्यक्ष खुद इस राष्ट्रीय और संवैधानिक विषय पर पत्रकारों के सामने बोलने से बच रहे हैं? चुनाव आयोग जैसे तकनीकी विषय पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब देना संगठनात्मक क्षमता की परीक्षा है।
दूसरा – क्या पार्टी ने ही उन्हें कमजोर कर दिया है? जब मुख्य वक्ता जिला पंचायत अध्यक्ष को बनाया गया, तो संदेश साफ है कि संगठन से ज्यादा सत्ता पक्ष के चेहरे पर भरोसा जताया गया।
तीसरा – और सबसे अहम, क्या यह आने वाले समय के संकेत हैं? इस एक प्रेसवार्ता के बाद जांजगीर की राजनीति में सत्यलता मिरी का कद अचानक बढ़ा हुआ दिख रहा है। उन्हें अब सिर्फ जिला पंचायत अध्यक्ष नहीं, बल्कि भाजपा की मुख्य प्रवक्ता के तौर पर देखा जा रहा है।
जिले के कई कार्यकर्ता दबी जुबान में कह रहे हैं कि मिरी की आक्रामक शैली और तथ्यों के साथ जवाब देने की क्षमता ने उन्हें संगठन में नई ऊंचाई दी है। वहीं अम्बेश जांगड़े की चुप्पी ने उनके कद को कम करने का काम किया है।
राजनीति में मंच ही संदेश होता है। और इस मंच ने बता दिया कि जांजगीर भाजपा में अब चेहरा बदल रहा है। प्रेसवार्ता कांग्रेस के खिलाफ थी, लेकिन चर्चा भाजपा के अंदर की हो रही है – कि अगला जिलाध्यक्ष कौन?

