शारदीय नवरात्र 2026: मां दुर्गा को पूजा के दौरान क्या-क्या करते हैं अर्पित, छत्र और मुकुट चढ़ाने की क्यों है परंपरा

रायपुर: नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है. शारदीय नवरात्रि का यह पर्व 19 अक्टूबर चलेगा. पूरे 9 दिनों तक माता की भक्ति और आराधना का पर्व हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाएगा. नवरात्रि के 9 दिनों में चांदी के बने सामान जिसमें माता जी के पायल, माता जी की मूर्ति, माता जी के छत्र माता जी के नयन, माता जी के मुकुट जैसी चीजों की डिमांड बढ़ जाती है.
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सभी धातुओं में चांदी पवित्र और शुद्ध धातु मानी गई है. भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर मंदिरों में देवी मां को चांदी से बने इस तरह के समान अर्पित करते हैं. लोगों में यह धार्मिक भावना सनातन काल से चली आ रही है. इस परंपरा का निर्वहन आज भी लोग करते हैं. वर्तमान समय में सोना महंगा होने के कारण गिने-चुने लोग सोने के आभूषण माता को अर्पित करते हैं.
ज्योतिष एवं वास्तुविद पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी कहते हैं, “नवरात्रि में माता को क्या-क्या अर्पित किया जाता है, यह बड़ा प्रश्न है. माता को श्रृंगार का सामान अर्पित किया जाता है. कपड़े अर्पित किए जाते हैं. अपने अपने कलर के कपड़ों का अपना-अपना महत्व है. लाल रंग का कपड़ा शक्ति का प्रतीक है. हरा रंग का कपड़ा समृद्धि का प्रतीक है. सफेद रंग का कपड़ा शांति का प्रतीक है. लाल वस्त्र लाल फूल अर्पित किए जाते हैं. इसके साथ ही अनार के दानों का भोग लगता है. इसी तरह से श्रृंगार में भी हम भगवती का श्रृंगार का सारा सामान साथ में जैसे चांदी का मुकुट माथे पर होता है. ऐश्वर्या की प्राप्ति के लिए लोग चांदी का मुकुट अर्पित करते हैं. लोग गले के लिए कंठी या आभूषण चढ़ाते हैं. ये आपकी श्रद्धा और भक्ति के समर्पण का प्रतीक होता है.”




