छत्तीसगढ़

छत्‍तीसगढ़ के सदन में उठी जांच की मांग…विपक्ष ने कहा विधानसभा की कार्यवाही का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल करना विशेषाधिकार का हनन

रायपुर

बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही का (अंश) वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। विधानसभा अध्यक्ष डा. चरणदास महंत ने इसे संसदीय परंपरा के विपरीत बताते हुए आगाह किया। विपक्ष ने भी इस पर आपत्ति करते हुए जांच की मांग की। विपक्षी सदस्यों ने इसे विशेषाधिकार हनन का मामला बताते हुए इस पर सदन में चर्चा की मांग की। इस पर डा. महंत ने कहा कि मैंने इस संबंध में व्यवस्था दे दी है भविष्य में ऐसा नहीं होना चाहिए।

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मानूसन सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष डा. महंत ने सदन को वायरल वीडियो के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंत्रियों और सदस्यों की सुविधा के लिए उनके कक्ष में टीवी लगाई गई है। वहां सीसीटीवी के माध्यम से कार्यवाही के प्रसारण की व्यवस्था की गई है, ताकि सदन में कार्यवाही से वे अवगत रहे। उन्होंने कहा कि मंगलवार को किसी ने ऐसे ही किसी टीवी से वीडियो बनाकर सदन की कार्यवाही का अंश इंटरनेट मीडिया में वायरल किया गया है।

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अध्यक्ष के जानकारी देते ही विपक्ष के सदस्य बृजमोहन अग्रवाल, नारायण चंदेल और अजय चंद्राकर समेत अन्य अपने स्थान पर खड़े हो गए और पूरे मामले की जांच की मांग करने लगे। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक कहा कि वीडियो वायरल करने का अधिकार सदन के नेता और नेता प्रतिपक्ष को भी नहीं है। यह घोर आपत्तिजनक है। इस पर तुरंत चर्चा होनी चाहिए और सदन की समिति से जांच होनी चाहिए। वहीं, चंद्राकर ने मुख्यमंत्री का वीडियो जारी किए जाने पर आपत्ति की। बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के उस बयान का है जो उन्होंने मंगलवार को सदन छोड़ने से पहले दिया था।

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विशेषाधिकार का हनन-बृजमोहन 
बृजमोहन ने इसे विशेषाधिकार का हनन बताया। विधानसभा प्रक्रिया कार्य संचालन नियम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी सदस्य कार्यवाही का इस तरह प्रचार नहीं कर सकता।

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