बिलासपुर

आयोग के अध्यक्षों की नियुक्ति के खिलाफ जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने मांगा जवाब, राज्य शासन सहित अन्य पक्षकारों को जारी किया नोटिस

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राज्य शासन द्वारा बाल अधिकार संरक्षण आयोग के साथ ही अनुसूचित जाति जनजाति आयोग सहित विभिन्न् आयोग में हुई अध्यक्षों की नियुक्ति को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य शासन सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दुर्ग के सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक चौबे ने अधिवक्ता योगेश्वर शर्मा के माध्यम से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें बताया गया है कि राज्य शासन ने विभिन्न् संवैधानिक पद जैसे बाल अधिकार संरक्षण आयोग, अनुसूचिज जाति-जनजाति आयोग आदि में अध्यक्ष पदों पर सिर्फ राजनीतिक आधार पर राजनीति से जुड़े लोगों की नियुक्ति कर दी है। उनकी नियुक्ति में न तो किसी प्रक्रिया का पालन किया गया है और न ही पारदर्शिता बरती गई है। जबकि प्रविधान के अनुसार ऐसे संवैधानिक पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर योग्य व अनुभवी लोगों की नियुक्ति की जानी चाहिए। लेकिन, सरकार ने अपनी मर्जी से राजनीतिक रूप से उपकृत करने वालों अध्यक्ष पद पर आसीन कर दिया है। याचिका में बताया गया है कि बाल अधिकारों के संरक्षण में कार्य करने वाले विशेषज्ञों को बाल अधिकार संरक्षण आयोग का अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। इसी अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के जानकार व विशेषज्ञता रखने वालों को ही चयनित कर अध्यक्ष नियुक्त करना चाहिए। याचिका में यह भी बताया गया है कि बाल अधिकार संरक्षण आयोग में अध्यक्ष की नियुक्ति चयन समिति के माध्यम से की जानी थी। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी हवाला दिया गया है और संवैधानिक पदों पर नियुक्ति के लिए दिए गए आदेश व प्रविधान की भी जानकारी दी गई है। याचिका में बताया गया है कि विषय विशेष में अनुभवी व योग्यता का भी ध्यान रखकर अध्यक्षों की नियुक्ति की जानी है। याचिका में बताया गया कि राज्य शासन ने बिना किसी प्रक्रिया का पालन किए संवैधानिक पदों पर असंवैधानिक तरीके से नियुक्ति कर दी है, जिसे अवैधानिक बताया गया है। जनहित याचिका की प्रांरभिक सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य शासन सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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