छत्तीसगढ़

3 महीने के बच्चे का होना था ऑपरेशन, लेकिन भूख से हो गई मौत! परिजनों ने डॉक्टर पर लगाया आरोप

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर के दलपत सागर वार्ड में स्थित माँ दंतेश्वरी ट्रॉमा एंड क्रिटिकल केयर सेंटर अस्पताल में लापरवाही का एक मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल में प्रैक्टिस कर रहे एक डॉक्टर और प्रबंधन की लापरवाही के चलते 3 महीने के मासूम बच्चे की मौत हो गई। अब बच्चे के माता-पिता ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और बोधघाट थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

जानकारी के अनुसार, जगदलपुर शहर के नयामुंडा निवासी आशीष मंडल और उनकी पत्नी निशा मंडल ने बताया कि उनका बेटा मिताश मंडल स्वस्थ पैदा हुआ था, जन्म के समय उसका वजन 3 किलो 200 ग्राम था। करीब 3 महीने के बाद उनके बच्चे का सिर थोड़ा बड़ा होने लगा। पहले उन्होंने शिशु रोग विशेषज्ञ तरुण नायर को दिखाया लेकिन डॉक्टर ने इसे न्यूरो का केस होने से इलाज करने से मना कर दिया और उन्हें बेहतर इलाज के लिए बाहर रेफर करने को कहा। जिसके बाद बच्चे के माता-पिता ने शहर के ही नामचीन डॉक्टर डॉ. दुल्हानी को अपने बच्चे को दिखाया, जिसके बाद डॉ. दुल्हानी ने माँ दंतेश्वरी ट्रॉमा एंड क्रिटिकल केयर सेंटर में प्रैक्टिस कर रहे न्यूरोसर्जन डॉ. पवन बृज को दिखाने की सलाह दी। इसके बाद वह अपने बच्चे को लेकर दंतेश्वरी हॉस्पिटल पहुंचे।

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इस दौरान वहां मौजूद डॉक्टर पवन बृज ने उनसे कहा कि उनके बच्चे का ऑपरेशन करना पड़ेगा और 20 मिनट में ऑपरेशन सफल हो जाएगा। डॉक्टर से आश्वासन मिलने के बाद माता-पिता ने अपने बच्चे को दंतेश्वरी अस्पताल में भर्ती कराया। बच्चे की मां निशा मंडल ने बताया कि ऑपरेशन से एक दिन पहले उनके पति आशीष मंडल शहर से बाहर थे। भर्ती के दौरान उनके 3 महीने के बच्चे को नॉर्मल वार्ड में ही रखा गया, बच्चों के लिए अलग से कोई वार्ड अस्पताल में नहीं था। डॉक्टर ने भरोसा दिया था कि ऑपरेशन सफल हो जाएगा।

भर्ती होने के अगले दिन अस्पताल के स्टाफ ने बताया कि शाम 4 बजे डॉक्टर पवन बृज अस्पताल पहुंचेंगे और उसके बाद उनके बच्चे का ऑपरेशन होना है। इस वजह से बच्चे को दोपहर 2:00 बजे के बाद से भूखे पेट रखने को कहा गया। बच्चे की मां निशा मंडल का कहना है कि ऑपरेशन 4 बजे होना था लेकिन शाम को 6:00 बजे तक भी डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुंचे। भूख की वजह से उनका बच्चा लगातार रोने लगा। शाम के साढ़े 6 बज गए, इसके बावजूद भी डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुँचे। नर्स के द्वारा केवल आश्वासन दिया जा रहा था कि कुछ देर में ऑपरेशन किया जाएगा लेकिन उनका बच्चा भूख के मारे रोता रहा।

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तकरीबन शाम 6 बजे के बाद डॉक्टर हॉस्पिटल पहुंचने के बाद परिजनों को उम्मीद जगी कि अब ऑपरेशन के बाद बच्चा स्वस्थ हो जाएगा। बच्चे का ऑपरेशन होता, इससे पहले कि ऑपरेशन शुरू हो पाता, रात करीब 8:15 बजे उनके बच्चे के शव को उन्हें सौंप दिया गया और बताया गया कि बच्चे की धड़कन काफी धीमी चल रही थी, इस वजह से ऑपरेशन नहीं किया गया।

बच्चे की मां निशा मंडल का कहना है कि अस्पताल में भर्ती कराने से पहले उनका बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ था, लेकिन ऑपरेशन के दिन दोपहर 2 बजे से रात 8:00 तक बच्चे को फीडिंग कराने नहीं दिया गया, जिस वजह से भूख के चलते उनके बच्चे की मौत हो गई। बच्चे के माता-पिता ने डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते अपने बच्चे की मौत होना बताया है। बच्चे की मां ने यह भी बताया कि उनके बच्चे की मौत होने के बाद डॉक्टर पवन बृज ने परिजन से किसी तरह की बात नहीं की और न ही उनसे मुलाकात की। ऑपरेशन के नाम पर दवाई और भर्ती के लिए उनसे करीब 70 हजार रुपये फीस ले लिए गए। हालांकि बच्चे की मौत के दूसरे दिन परिजनों द्वारा अस्पताल में हंगामा करने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें पैसे वापस लौटा दिए। बच्चे के माता-पिता का आरोप है कि डॉक्टर पवन बृज और अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते उनके बच्चे की मौत हो गई, उन्हें अब इंसाफ चाहिए। अवैध रूप से चल रहे अस्पताल को सील करना चाहिए और डॉक्टर पवन बृज पर कार्रवाई होना चाहिए। न्याय की मांग को लेकर बच्चे के माता-पिता ने बोधघाट थाना और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को लिखित में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

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