छत्तीसगढ़

दरिंदगी को रोकने पॉक्सो एक्ट-2012 में बदलाव, 12 साल तक की बच्ची से रेप के दोषियों को मौत की सजा

दुर्ग

देश में बच्चियों के साथ बढ़ती दरिंदगी को रोकने के लिए पॉक्सो एक्ट-2012 में बदलाव किया गया है। जिसके तहत अब 12 साल तक की बच्ची से रेप के दोषियों को मौत की सजा मिलेगी। नए संशोधनों के तहत स्कूल, केयर होम और ऐसे अन्य संस्थानों में कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए पुलिस सत्यापन को अनिवार्य करने के साथ कुछ अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। जिला व सत्र न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव के निर्देशन में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश वर्मा, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेक वर्मा और अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अविनाश त्रिपाठी द्वारा ऑनलाइन वीसी के माध्यम से पॉक्सो कानून के तहत जानकारी प्रदान किया गया। न्यायधीशों ने बताया कि पॉक्सो, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम का संक्षिप्त नाम है। पॉक्सो एक्ट-2012 के अंतर्गत बच्चों के प्रति यौन उत्पीडऩ और यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे जघन्य अपराधों को रोकने के लिए, महिला और बाल विकास मंत्रालय ने पॉक्सो एक्ट-2012 बनाया गया था।

बच्चों के साथ किसी तरह का गलत व्यवहार उनके जीवन को अंधेरे में धकेल सकता है। बच्चों को मानसिक और शारीरिक तौर पर कई तरह की दिक्कतों से होकर गुजरना पड़ सकता है। अपराधी नियम-कानून को ताक पर रखकर मासूमों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हैं। बच्चों के साथ छेड़छाड़, रेप, यौन उत्पीडऩ, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे जघन्य अपराधों पर रोक लगाने के लिये पॉक्सो ई-बाक्स प्रारंभ किया गया है। यदि आपके बच्चों को कोई गलत तरीके से छूता है, गलत हरकतें या गन्दी बातें करता है और उन्हें गन्दी तस्वीरें दिखाता है तो बच्चे बिना किसी को बताए स्वयं ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिला सकते हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता भी अपने बच्चों को पॉक्सो ई-बाक्स के बारे में बताएं और उन्हें जागरूक बनाएं, यह हमारा कर्तव्य बनता है कि हम बच्चों की मदद करें, शोषण का शिकार होने से अपने बच्चों को बचाएं और दोषियों को पॉक्सो एक्ट के तहत सजा दिलाएं। पॉक्सो एक्ट लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है। इस कानून के तहत पंजीकृत होने वाले मामलों की सुनवाई भी विशेष अदालत में की जाएगी। बच्चों के प्रति यौन उत्पीडऩ, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे जघन्य अपराधों को रोकना ही हमारा कर्तव्य है।

इस कानून के जरिए नाबालिग बच्चों के प्रति यौन उत्पीडऩ, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है। 18 साल से कम किसी भी मासूम के साथ अगर दुराचार होता है तो वह पॉक्सो एक्ट के तहत आता है। पॉक्सो के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस की यह जवाबदेही हैं कि पीडि़त का मामला 24 घंटो के अन्दर बाल कल्याण समिति के सामने लाया जाए, जिससे पीडि़त की सुरक्षा के लिए जरुरी कदम उठाए जा सके, इसके साथ ही बच्चे की मेडिकल जाँच करवाना भी अनिवार्य हैं। ये मेडिकल परीक्षण बच्चे के माता-पिता या किसी अन्य व्यक्ति की उपस्थिति में किया जाएगा जिस पर बच्चे का विश्वास हो, और पीडि़त अगर लड़की है तो उसकी मेडिकल जांच महिला चिकित्सक द्वारा ही की जानी चाहिए।

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