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डाक्टर मनमोहन सिंह की 94 वें जयंती, अटल बिहारी वाजपेई और डाक्टर मनमोहन सिंह का एक प्रसंग

सीता टंडन, जांजगीर-चाम्पा

आज भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री की 94 वें जयंती है । भारत के शांत प्रधानमंत्री और एक कुशल वित्तमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह की राजनीतिक शुचिता और नैतिकता की बानगी अपने जीवनी परक उपन्यास में भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने बताया है । उन्होंने बताया कि जब नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री थे तब डाक्टर मनमोहन सिंह देश के वित्तमंत्री थे और उस समय विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेई थे । एक बार जब वित्त मंत्री डाक्टर मनमोहन ने अपना बजट पेश किया तो विपक्ष के नेता रहे अटल बिहारी वाजपेई ने उस बजट की तीखी आलोचना की तब डाक्टर मनमोहन ने उस आलोचना को अपनी बजट की कमी मानकर अपना इस्तीफा देने का मन बना लिया था और इस विषय में प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को अवगत कराया । नरसिम्हा राव जानते थे कि डाक्टर मनमोहन सिंह भावावेश में इस्तीफा देने सोच रहे हैं और उन्हें डाक्टर मनमोहन सिंह की कार्यकुशलता और विद्वत्ता पर रंच मात्र भर भी संदेह नहीं था । उन्होंने विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेई को फोन लगाकर ये बात बताई कि उनकी तीखी आलोचना से डाक्टर मनमोहन सिंह इस्तीफा देने जा रहे हैं तब अटल बिहारी वाजपेई ने वित्त मंत्री डाक्टर मनमोहन को फोन कर कहा कि आपको राजनीतिक आलोचना को व्यक्तिगत नहीं लेना चाहिए । ऐसा तो राजनीति में हमेशा होता रहेगा । इस तरह की आलोचना को व्यक्तिगत मत लीजिए । अटल बिहारी वाजपेई की बातों को सुनकर उन्होंने इस्तीफा देने के ख्याल को अलविदा कह दिया उसके बाद अटल बिहारी वाजपेई और डाक्टर मनमोहन सिंह सदैव एक स्वस्थ राजनीतिक मानसिकता के साथ आलोचना- समालोचना देखते करते और अटल बिहारी वाजपेई के जीवित रहते तक डाक्टर मनमोहन सिंह उनसे उनके जन्मदिन पर मिलते रहे । इस प्रसंग से पता चलता है कि डाक्टर मनमोहन सिंह में इतनी नैतिकता थी कि वे अपने बजट की असफलता मात्र से इस्तीफा दें रहे थे वहीं अटल बिहारी वाजपेई ने उन्हें इस्तीफा देने से रोककर राजनीति में नैतिकता और शुचिता की मिसाल पेश की । क्या आज ऐसी राजनीतिक शुचिता और नैतिकता की हम कल्पना कर सकते हैं ।

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