ई-फार्मेसी का विरोध : छत्तीसगढ़ की 18 हजार दवा दुकानें रही बंद, 100 करोड़ का कारोबार ठप रहा

रायपुर। ई-फार्मेसी के विरोध में बुधवार को राज्य की करीब 18 हजार थोक और रिटेल की दवा दुकानें बंद रही। संगठित तरीके से हुए इस बंद से एक दिन में करीब सौ करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। राजधानी के थोक दवा बाजार एवं मेडिकल कांपलेक्स में सन्नाटा रहा। आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए वहां लगाए गए हेल्प डेस्क से कुछ लोगों को इमरजेंसी की दवा उपलब्ध कराई गई।
वहीं अस्पतालों के अलावा धनवंतरी और जन औषधि केंद्रों में आवश्यक दवाएं मिलती रही। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के आह्वान पर बुधवार को देशभर के केमिस्टों ने अपना व्यापार बंदकर ई-फार्मेसी का विरोध जताया था। राजधानी समेत समूचे छत्तीसगढ़ में दवा व्यापारियों के संगठन ने इसका समर्थन किया था। दवा कारोबारियों ने बुधवार को अपने कर्मचारियों को छुट्टी दे दी थी जिसके वजह से उनके संस्थानों का ताला नहीं खुला।
प्रतिनिधियों ने दवा कारोबार से जुड़े लोगों से मुलाकात की
दवा कारोबारी मेडिकल कांप्लेक्स में एकजुट होकर धरने पर बैठे रहे और आपात स्थिति में दवा के भटकते हुए वहां आने वालों को दवा का वितरण भी करते रहे। इनके द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम कलेक्टर एवं ड्रग कंट्रोलर को ज्ञापन प्रस्तुत किया गया है। दवा व्यापारियों के इस आंदोलन को कैट, चेंबर ऑफ कॉमर्स और कांग्रेस के चिकित्सा प्रकोष्ठ ने समर्थन दिया है। उनके प्रतिनिधियों ने मेडिकल कांपलेक्स आकर दवा कारोबार से जुड़े लोगों से मुलाकात की।
सरगुजा में बाइक रैली, रायगढ़ में प्रदर्शन
बंद को प्रदेशस्तर पर दवा कारोबारियों ने समर्थन दिया था। राजधानी में मेडिकल परिस में एक दिवसीय धरना स्थल बनाया गया। सरगुजा में दुकानें बंद कर दवा कारोबारियों ने बाइक रैली निकाली। रायगढ़ में दवा विक्रेताओं ने प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की। इसके अलावा अन्य जिलों और ग्रामीण इलाकों में भी दवा दुकानें बंद रही।
फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन का दौर
दवा व्यापारियों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन दवा कारोबार से फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन की समस्या सामने आ रही है। साथ ही प्रतिबंधित दवाओं की बिना किसी रोकटोक की बिक्री बढ़ हुई है। रायपुर जिले के दवा व्यापारियों ने कहा कि गंभीर विषयों पर शीघ्र प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई तो व्यापक आंदोलन का निर्णय भी लिया जा सकता है।




