छत्तीसगढ़ में महंगी होगी बिजली : नियामक आयोग में चल रहा मंथन, इस माह नया टैरिफ जारी करने की तैयारी

रायपुर। प्रदेशभर के बिजली उपभोक्ताओं को इस माह जून से महंगी बिजली का झटका लग सकता है। नए सत्र के लिए बिजली का नया टैरिफ जारी करने की बिजली नियामक आयोग में तैयारी चल रही है। जून में कभी भी इसको जारी किया जा सकता है। आयोग तय करेगा कि नया टैरिफ जून से लागू होया या फिर अगले माह जुलाई से।
टैरिफ पर फैसला करने में इसलिए विलंब हो रहा है, क्योंकि आयोग में छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनियों ने अपने आने वाले चार साल का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया है। इसका आकलन करने में ज्यादा समय लग रहा है। इसी के साथ नए सत्र के लिए 63 सौ करोड़ घाटे की याचिका के कारण भी इसके मंथन में विलंब हो रहा है। नियमों के मुताबिक, जब पॉवर कंपनी नए सत्र के लिए टैरिफ का लेखा-जोखा नियामक आयोग में देती है तो उसको चार साल के खर्च का हिसाब देना रहता है। एक बार चार साल का लेखा-जोखा देने के बाद फिर हर साल चार साल का लेखा-जोखा देने की जरूरत नहीं होती है।
पॉवरकंपनी ने नए सत्र 2026-27 के लिए पूरा लेखा-जोखा बनाकर नियामक आयोग में नए टैरिफ के लिए याचिका दायर की है। इस याचिका में बताया गया है कि प्रचलित दर से 26216 करोड़ का राजस्व मिलने की संभावना है। इसी के साथ साल भर का खर्च 25460 करोड़ बताया गया है।
ऐसे में 756 करोड़ का फायदा होगा। लेकिन इसी के साथ पिछले सत्रों की अंतर की राशि का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि नए सत्र के फायदे को पुराने अंतर की राशि में कम करने के बाद भी 63 सौ करोड़ के राजस्व की और जरूरत होगी। नए सत्र में 26 सौ करोड़ का राजस्व मिलेगा, पुराना घाटा 63 सौ करोड़ है, ऐसे में नए सत्र के लिए कुल 32 हजार पांच सौ करोड़ से ज्यादा के राजस्व की जरूरत बताई गई है। इस जरूरत के हिसाब से ही नया टैरिफ तय करने की मांग रखी गई है।
पॉवर कंपनी ने अपनी याचिका में बताया है कि उसको 2026-27 के लिए 25460.30 करोड़ के राजस्व की जरूरत है। इसमें सबसे ज्यादा 21150.81 करोड़ का खर्च बिजली खरीदने पर होगा। इसी के साथ 3250.34 करोड़ संचारण एवं संधारण का खर्च है। 429.50 करोड़ का ब्याज, 1116.15 करोड़ अन्य व्यय होगा। इसके बाद 2027-28 में बिजली खरीदी पर 22437.96 करोड़ का खर्च होगा।
इसके बाद 3614.89 करोड़ संचारण एवं संधारण खर्च, 1259.58 करोड़ अन्य खर्च और 518.27 करोड़ का खर्च ब्याज पर होगा। इस सत्र में कुल 27306.02 करोड़ का खर्च होगा। 2028-29 में 24964.63 करोड़ का खर्च बिजली खरीदी पर होगा। संचारण एवं संधारण का खर्च भी बढ़कर 3940.21 करोड़ होगा। अन्य खर्च जहां 1381.35 होगा वहीं ब्याज पर 587.62 करोड़ लगेंगे। ऐसे में कुल मिलाकर 30307.93 करोड़ के राजस्व की जरूरत होगी। इसी तरह से 2029-30 के सत्र में सबसे ज्यादा 27179.48 करोड़ का खर्च बिजली खरीदी पर लगेगा।




