अकलतरा स्टेट हाईवे की दुर्दशा: निजी परिसर में पानी भरने पर राइस मिल संचालक ने खोद दी सड़क, मचा हंगामा

जांजगीर चांपा। निजी परिसर में भरे पानी की निकासी के लिए बिना अनुमति स्टेट हाईवे को जेसीबी से खोदने के मामले में आखिरकार लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने अकलतरा के महावीर राइस मिल के संचालक के खिलाफ अकलतरा थाने में एफआईआर दर्ज करा दी है। सरकारी सड़क को नुकसान पहुंचाने और कई घंटे तक सार्वजनिक आवागमन बाधित करने की इस घटना ने अब नया मोड़ ले लिया है। सड़क खोदने की कार्रवाई के बाद क्षेत्रवासियों ने राइस मिल परिसर के पास स्थित नाले पर कथित अतिक्रमण और पूरी भूमि का राजस्व विभाग से सीमांकन कराने की मांग भी तेज कर दी है।
जानकारी के अनुसार लगातार दो दिनों तक हुई वर्षा के कारण महावीर राइस मिल परिसर में पानी भर गया था। आरोप है कि जल निकासी के लिए राइस मिल संचालक ने बिना किसी शासकीय अनुमति के जेसीबी मशीन से अकलतरा – शिवरीनारायण स्टेट हाईवे को तीन से चार फीट तक खोद दिया। इससे सड़क पर आवागमन पूरी तरह बंद हो गया और नगर का प्रमुख संपर्क मार्ग लगभग चार घंटे तक बाधित रहा। इस दौरान दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय नागरिकों ने इसका विरोध किया और प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर सड़क को हुए नुकसान का आकलन किया। विभाग के अनुसार सड़क को लगभग 5.30 लाख रुपये की क्षति हुई है। मामले को गंभीर मानते हुए विभाग ने अकलतरा थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर महावीर राइस मिल संचालक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 285, 324(5) तथा लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 3 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में खासा आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि अकलतरा में पहले भी कई बार इससे अधिक वर्षा हुई है। अनेक घरों और दुकानों में पानी घुसने से लोगों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन किसी ने भी अपनी निजी समस्या के समाधान के लिए सरकारी सड़क को नहीं खोदा। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर पूरे नगर की आवाजाही रोक देना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
सड़क खोदने की घटना के बाद एक और गंभीर मुद्दा सामने आया है। आसपास के लोगों का आरोप है कि जिस स्थान पर राइस मिल संचालक का मकान और परिसर स्थित है, वहां पहले एक बड़ा प्राकृतिक नाला था। उनका कहना है कि नाले पर निर्माण कर उसकी चौड़ाई कम कर दी गई और जल निकासी का प्राकृतिक मार्ग बदल दिया गया। लोगों का दावा है कि यदि नाले से छेड़छाड़ नहीं की गई होती तो वर्षा का पानी आसानी से निकल जाता और जलभराव की नौबत नहीं आती।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे राइस मिल परिसर और आसपास की भूमि का राजस्व विभाग से सीमांकन कराया जाए। उनका कहना है कि सीमांकन से स्पष्ट हो जाएगा कि कहीं सरकारी भूमि या नाले पर अतिक्रमण तो नहीं किया गया है। यदि जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई कर अतिक्रमण हटाया जाना चाहिए।
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। नागरिकों का कहना है कि यदि नाले पर अतिक्रमण और भूमि संबंधी शिकायतें सही हैं तो केवल सड़क खोदने के मामले में कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सीमांकन कराया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था भी सुरक्षित रह सके।
छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने कहा, “यह अत्यंत गंभीर मामला है। जानकारी के अनुसार राइस मिल संचालक द्वारा पूर्व में बड़े नाले पर निर्माण कर उसे संकरा और डायवर्ट कर दिया गया। यदि प्राकृतिक जल निकासी से छेड़छाड़ नहीं हुई होती तो आज यह स्थिति शायद उत्पन्न नहीं होती। प्रशासन को पूरे क्षेत्र का सीमांकन कराकर यदि कहीं अतिक्रमण हुआ है तो नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।”




