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17 करोड़ का स्नेक बाइट मुआवजा घोटाला: फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खेल, सिम्स की डॉक्टर और 3 क्लर्क गिरफ्तार, 16 प्रकरणों की चल रही जांच

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सिम्स में पदस्थ रहीं डॉ. प्रियंका सोनी समेत एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय के 3 क्लर्क को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सर्पदंश से मौत की फर्जी रिपोर्ट तैयार कर 17 करोड़ रुपये से अधिक के मुआवजे का घोटाला किया गया। फिलहाल इस मामले से जुड़े 16 प्रकरणों की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। 

दरअसल, जशपुर जिले में सर्पदंश से पिछले तीन वर्षों में केवल 96 मौतें दर्ज हुईं, जबकि अकेले बिलासपुर में 431 मौतें बताकर 17 करोड़ 24 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया। विधानसभा में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया था। काफी हंगामे के बाद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी।

सामने आया था। उस मामले में भी डॉ. प्रियंका सोनी, मृतक के परिजन और एक वकील को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

स्नेक बाइट के फर्जी मामले में एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और तहसीलदार कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर राठौर भी शामिल पाए गए हैं। पुलिस ने उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया है।

शासन के नियमों के अनुसार, सांप काटने पर 4 लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान है। यही वजह है कि सरकारी मुआवजा हासिल करने लोगों ने अपने परिजनों की सामान्य मौत को सर्पदंश बताकर  सरकार से लाखों रुपए मुआवजा ले लिए। महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की संदिग्ध मौत के मामलों को स्नेक बाइट का मामला बनाया गया था। इस मामले में दो मृतकों के रिश्तेदार और एक वकील समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

जांच के दायरे में सिम्स के 4 से 5 डॉक्टर भी हैं, जिन पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने का संदेह है। कुछ डॉक्टरों से पूछताछ की जा चुकी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

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