छत्तीसगढ़

मां बम्लेश्वरी के दर्शन करने आए युवक की तालाब में डूबने से मौत, दोस्तों ने सुरक्षा और इलाज पर उठाए सवाल

डोंगरगढ़। मां बम्लेश्वरी के दर्शन के लिए दोस्तों के साथ डोंगरगढ़ आए महाराष्ट्र के नागपुर निवासी 18 वर्षीय शशांक शांडेल की क्षीरपानी तालाब में डूबने से मौत हो गई। नवरात्रि मेले के पहले ही दिन रविवार को हुए इस हादसे से साथ आए दोस्तों में मातम पसर गया। बताया जा रहा कि नहाने के दौरान पैर फिसलने से युवक गहरे पानी में चला गया था। एसडीआरएफ और गोताखोरों की मदद से उसे बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। घटना के बाद सरोवर में सुरक्षा इंतजाम और समय पर चिकित्सा सहायता मिलने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के मुताबिक, शशांक रविवार 11 अक्टूबर को नवरात्रि के पहले दिन मां बम्लेश्वरी के दर्शन करने दोस्तों के साथ डोंगरगढ़ पहुंचा था। दोपहर करीब 2:30 बजे वह क्षीरपानी सरोवर में नहाने के लिए उतरा। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। देखते ही देखते वह डूबने लगा, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही बचाव कार्य शुरू किया गया। एसडीआरएफ के जवानों और गोताखोरों ने सरोवर में तलाश कर युवक को बाहर निकाला। इसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। दर्शन के लिए घर से निकले युवक की मौत की खबर से उसके दोस्तों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

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डोंगरगढ़ थाना प्रभारी रामेश्वर देशमुख के अनुसार, युवक के गहरे पानी में चले जाने से यह हादसा हुआ। मामले की जांच की जा रही है। परिजनों के पहुंचने के बाद सोमवार को शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। डोंगरगढ़ में नवरात्रि के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में क्षीरपानी तालाब जैसे जल क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही पर निगरानी, गहरे पानी में जाने से रोकने के इंतजाम और आपात स्थिति में तत्काल बचाव की व्यवस्था बेहद अहम है। इस हादसे ने एक बार फिर इन व्यवस्थाओं पर ध्यान खींचा है।

मृतक के दोस्तों ने घटना के बाद समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं होने को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, युवक को बचाने के प्रयासों, प्राथमिक उपचार और अस्पताल पहुंचाने में लगे वास्तविक समय की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि हादसे के बाद बचाव और चिकित्सा सहायता किस क्रम में तथा कितनी जल्दी उपलब्ध कराई गई। नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए तालाब परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है। सवाल सिर्फ हादसे के बाद बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि ऐसे जल क्षेत्रों में दुर्घटनाओं को रोकने और किसी की जान पर संकट आने की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए क्या इंतजाम हैं।

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