छत्तीसगढ़

एक ड्राइवर से परेशान 4 एसडीएम, लेटर देकर कलेक्टर को बताई आपबीती, आपको चौंका देगी ये कहानी

बालोद. जिला प्रशासन में कभी-कभी यह देखने में तो आता है कि छोटे कर्मचारी अपने बड़े अफसरों की शिकायत करते हैं. वे अक्सर कहते हैं कि सीनियर उन्हें परेशान करते हैं. लेकिन, ऐसा कभी नहीं होता कि सीनियर अफसर ये शिकायत करते फिरें कि जूनियर ने उनकी नाक में दम कर रखा है. अगर सच में ऐसा है, तो इस पर आप क्या कहेंगे? जी हां ये अनोखा मामला छत्तीसगढ़ के बालोद जिले का है. जिले के सभी 4 एसडीएम ने बालोद कलेक्टर से एक ड्राइवर की शिकायत की है. उन्होंने ड्राइवर पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है. इन सभी बड़े अफसरों का कहना है कि वे ड्राइवर की बदतमीजी और मनमानी से त्रस्त हो चुके हैं. सभी ने मिलकर कलेक्टर से न्याय मांगा है.

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गौरतलब है कि, बालोद के ब्लॉक के एसडीएम ने एक संयुक्त शिकायत पत्र कलेक्टर को सौंपा है. इसमें साफ लिखा है कि ड्राइवर कमल किशोर गंगराले अपने अधिकारियों को सर या मैडम नहीं कहता, बल्कि सीधे नाम लेकर संबोधित करता है. इतना ही नही ये ड्राइवर सिगरेट पीकर गाड़ी में बैठता है. इस वजह से महिला अधिकारियों को असहजता महसूस होती है. शिकायत में ये भी लिखा गया है कि किशोर बिना पूछे, बिना बताए अपनी मर्जी से छुट्टी ले लेता है. इस तरह के कई गंभीर बातों की जानकारी कलेक्टर को दी गई है.

ड्राइवर ने तोड़ दीं सारी सीमाएं
इस ड्राइवर ने उस वक्त सारी सीमाएं तोड़ दी थीं, जब उसने गुरूर की महिला एसडीएम प्राची ठाकुर की जगह डीजल पर्ची में अपने साइन कर दिए. उसने सरकारी गाड़ी खराब होने का हवाला देकर अधिकारी की निजी गाड़ी में डीजल डलवा दिया. उसके बाद अधिकारी पर ही सरकारी सुविधा के दुरुपयोग का झूठा आरोप लगा दिया. अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में कमल किशोर ने मीडिया में जाकर बयान बाजी की. उसने गुरूर की महिला एसडीएम को बदनाम किया, छवि खराब की. हालांकि, इस मामले के बाद कमल को गुरूर से हटाकर जिला कार्यालय में अटैच कर दिया गया.

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इतनी पावर रखता है एक एसडीएम
बता दें, किसी भी जिले के प्रशासनिक ढांचे में एसडीएम का पद बड़ी और गंभीर जिम्मेदारियों वाला होता है. एक एसडीएम के पास राजस्व शाखा की जिम्मेदारियों के साथ मजिस्ट्रियल पावर भी होता है. एक एसडीएम के नीचे तहसीलदार, नायब तहसीलदार, आरआई, पटवारियों की बड़ी टीम रहती है. किसी भी तरह के लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति में पुलिस भी एसडीएम के आदेश पर कार्रवाई करती है. अक्सर धरना प्रदर्शन के बाद एसडीएम को ही ज्ञापन सौंपे जाते हैं. इस तरह से राजस्व, लॉ एंड आर्डर, के अलावा राजनीतिक प्रदर्शनों तक एसडीएम का खास महत्व होता है. दूसरे शब्दो मे कहें तो किसी भी जिले को चलाने के लिए एसडीएम का बड़ा महत्व होता है.

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