छत्तीसगढ़ में अफीम का एक और खेत मिला : बलरामपुर जिले में दो एकड़ में लहलहाती मिली फसल, 2 लोग पकड़े गए

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में उबाल लाने वाले दुर्ग जिले के समोदा में अफीम की खेती का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि, एक और मामला सामने आ गया है। इस बार अफीम की खेती का मामला बलरामपुर से सामने आया है।
मिली जानकारी के मुताबिक, बलरामपुर जिले के त्रिपुरी गांव में अफीम की खेती मिलने से हड़कंप मच गया है। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंची हुई हैं। मुआयना किया जा रहा है कि, आखिर अफीम की खेती इस सुदूरवर्ती ग्रामीण अंचल में किसने की है। हालांकि पुलिस ने 2 खेत मालिकों को हिरासत में लिया है और पूछताछ में जुटी हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यहां अफीम की खेती लीज में लेकर की गई थी। वहीं पुलिस के लिये चुनौती है कि, आखिर खेती करने वाले लोग कहां से हैं और कहां -कहां पर अफीम की खेती की है।
ग्रामीणों को अब तक पता कैसे नहीं चला
दरअसल ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने अफीम की खेती का भंडाफोड़ किया है। लगभग 2 एकड़ खेत में अफीम की खेती की गई थी, लेकिन अहम सवाल यह है कि आखिर अफीम के पौधे एक दो दिन में तो इतने बड़े नहीं हुए होंगे जो ग्रामीणों को नजर आए हों। त्रिपुरी में लगभग 3 महीने पहले अफीम की खेती की नींव रखी गई होगी। लेकिन पुलिस का सूचना तंत्र फेल था और उसे इस खेती की भनक तक नही लगी। वैसे त्रिपुरी गांव जिले के अंतिम छोर पर बसा हुआ है। यहां से एक ओर झारखंड के लातेहार जिले की सीमा है, तो दूसरी ओर जशपुर जिले का सीमावर्ती इलाका है।
अब और तेज होगी सियासत
बहरहाल प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से अफीम की खेती ही बड़ा मुद्दा बनकर उभरा हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के आरोप- प्रत्यारोप का दौरा जारी है। सोशल मीडिया पर कई तरह के पोस्ट और मीम वायरल हुए हैं और इसी बीच बलरामपुर में अफीम की खेती ने प्रदेश की राजनीति में सुलग रही आरोप -प्रत्यारोप की आग को और हवा दे दी है। हालांकि त्रिपुरी के खेत मालिक ग्रामीण परिवेश के हैं और उन्होंने खेत लीज पर दिया हुआ था। ऐसे अब देखने वाली बात है कि, पुलिस अफीम की खेती करने वालो को कब तक गिरफ्तार कर पाती है।




