रायपुर

छात्रों ने बनाया ऐसा यंत्र, खेतों से जानवरों को उन्हीं की आवाज में भगाएगा

रायपुर

खेत में लगी फसल जानवरों से बचाने हर साल किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। कृषि महाविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग अंतिम वर्ष छात्र शेखर शर्मा और कैलाश अग्निहोत्री ने जानवरों को भगाने का अनोखा हल ढूंढ निकाला है। दोनों ने ऐसा साउंड सिस्टम तैयार किया है, जो जानवरों की भाषा में ही उन्हें डराकर खेतों से भगाने में मददगार साबित होगा। बातचीत में शेखर ने बताया, इस तरह के यंत्र का उपयोग एयरपोर्ट में प्लेन लैंडिंग के पहले पक्षियों को भगाने के लिए किया जाता है। हमने इसे नए तरीके से विकसित किया है। यंत्र में 15 से 20 जंगली व पालतू जानवरों की आवाजों को शामिल किया है, जिसका संकेत उन्हें भगाने से है। पिछले वर्ष लॉकडाउन में इस यंत्र को बनाना शुरू किया था। डेढ़ साल से जानवरों की भाषा पर काफी अध्ययन किया। उन्होंने बताया, यंत्र में जानवराें के आपस में लड़ने का आवाज, झुंड में भागने की आवाज समेत इंटरनेट की मदद से भी यंत्र में जानवरों की भाषा, आवाज को एकत्र किया है, जो जानवरों को उन्हीं की भाषा में डराता है।

See also  रायपुर के डॉ. नायक हुए 88 लाख रूपए की ठगी का शिकार, थाने में दर्ज कराई FIR

हर 30 मिनट में बदलता है आवाज

यह यंत्र सोलर एनर्जी समेत बैटरी से चलता है। इसमें नीलगाय, जंगली सुअर, भालू, हिरण, बंदर, लोमड़ी जैसे जानवरों की आवाज शामिल है। स्टूडेंट्स ने बताया, यंत्र एक तरह से म्यूजिक सिस्टम की तरह काम करता है। यंत्र के चालू होते ही इससे जानवरों की आवाज निकलने लगता है। हर 30 मिनट के बाद जानवर की आवाज बदल जाता है। 2 से 3 एकड़ में यह यंत्र काम करता है। इसमें टाइमर सिस्टम भी है, जिससे किसी एक जानवर की आवाज को सलेक्ट कर चलाया जा सकता है। रात में जंगली सुअर का आतंक अधिक होता है। ऐसे में किसान जंगली सुअर की आवाज सेट कर सकता है, जो पूरी रात चलता रहेगा। इस यंत्र से जानवरों व पक्षियों को किसी तरह का नुकसान भी नहीं होगा और खेत भी पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। खेतों में इसका प्रयोग प्रशिक्षण के दौरान सफल रहा हैै।

See also  परीक्षा में चर्चा: परीक्षा में बच्चे गलती क्यों करते हैं? छत्तीसगढ़ के छात्र ने पीएम मोदी से पूछा सवाल, जानें क्या है जवाब

किसानों के लिए लाभकारी यंत्र

को तैयार करने के लिए छात्रों ने इंटरनेट की भी मदद ली है। उनका कहना है, ऐसा यंत्र बेंगलुरु में बन चुका है। हमने इसे स्थानीय जानवरों के अनुसार उनकी आवाज रिकॉर्ड कर बनाया है। इसे बनाने का उद्देश्य किसानों की समस्या को दूर करना है। वर्तमान में यह केवल एक मॉडल के रूप में है। अनुदान मिलने पर इसे और भी बेहतर तरीके से बनाया जा सकता है, जो प्रदेश के किसानों के लिए लाभकारी साबित होगा।

Related Articles

Leave a Reply