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गुरु घासीदास की 268वीं जयंती : जैत खामों में होगी विशेष पूजा, गिरौधपुरी में जुटेंगे बड़ी संख्या में लोग

रायपुर। संत गुरु घासीदास की आज जयंती मनाई जा रही है. इस अवसर पर प्रदेश के एक छोर से लेकर दूसरे छोर तक जोरदार आयोजन की तैयारी चल रही है. देश-प्रदेश से हजारों की संख्या में लोग गुरु घासीदास की जन्मस्थली गिरौधपुरी धाम पहुंच रहे हैं. इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को बाबा घासीदास की जयंती पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं.

बता दें कि छत्तीसगढ़ के गिरोदपुरी में 18 दिसंबर 1756 को घासीदास का जन्म सतनामी जाति में हुआ था. गुरु घासीदास महंगू दास और अमरौतिन माता के पुत्र घासीदास ने सतनाम का प्रचार किया. गुरु घासीदास के बाद उनके पुत्र गुरु बालकदास ने शिक्षाओं और परंपरा को आगे बढ़ाया.

बाबा गुरु घासीदास के जीवनकाल में भारत में राजनीतिक माहौल शोषण का था. घासीदास ने कम उम्र में जाति व्यवस्था की बुराइयों का अनुभव किया, जिससे उन्हें जाति-ग्रस्त समाज में सामाजिक गतिशीलता को समझने और सामाजिक असमानता को खारिज करने में मदद मिली.

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गुरु घासीदास ने छत्तीसगढ़ में सतनामी समुदाय की स्थापना “सतनाम” अर्थात सत्य और समानता पर आधारित की थी. गुरु घासीदास ने सत्य का प्रतीक जय स्तंभ बनाया, जिसमें लकड़ी का एक सफेद रंग का लट्ठा, जिसके ऊपर सफेद झंडा लगा होता है. यह संरचना एक श्वेत व्यक्ति को दर्शाती है, जो सत्य का पालन करता है. सफेद झंडा शांति का संकेत देता है.

‘मनखे-मनखे एक समान’ का दिया संदेश

सीएम साय ने ट्वीट कर लिखा कि सतनाम पंथ के प्रवर्तक गुरु घासीदास की जयंती पर समस्त प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं. बाबा गुरु घासीदास ने सम्पूर्ण मानव जाति को ’मनखे-मनखे एक समान’ का प्रेरक संदेश देकर समानता और मानवता का पाठ पढ़ाया. उन्होंने छत्तीसगढ़ में सामाजिक और आध्यात्मिक जागरण की आधारशिला रखी. उनका जीवन दर्शन और विचार मूल्य आज भी प्रासंगिक और समस्त मानव जाति के लिए अनुकरणीय है.

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