गले तक पानी में जान संकट में डाल कर बच्चों को कंधे पर बैठा कर स्कूल छोड़ते हैं अभिभावक, परसाही नाला उफान पर, चार महीने कट जाते हैं गांव से ये 20 परिवार

अकलतरा के सुप्रसिद्ध गांव पोड़ी दल्हा में एक मोहल्ला ऐसा है जो बरसात के दिनो मे गांव से लगभग कट सा जाता है लेकिन रोजमर्रा के काम तो करने ही होते हैं इसलिए ये लोग या तो गले तक भरे नाले को पार कर परसाही नाला से होकर अपना बाहरी काम करते हैं या फिर कीचड़ भरे रास्ते से चलकर खेती-बाड़ी का काम करते हैं लेकिन इस बीच छोटे बच्चों को स्कूल लाना ले जाना दुष्कर कार्य भी बच्चों के भविष्य को सोचकर अभिभावक कर रहे हैं । पोड़ी दल्हा के विस्डम रायल पब्लिक स्कूल के नर्सरी में पढ़ने वाला जय कुमार और देवकुमार रोज बरसात के दिनो मे अपने पिता और दादा के कंधे में बैठकर सड़क तक आते है । जय कुमार के पिता बिजेंद्र मौवार ने बताया कि मेरे दो बेटे हैं जिसमें से एक देवकुमार परसाही नाला के सरकारी स्कूल में कक्षा दूसरी का छात्र है वहीं पिछले साल नर्सरी में पढ़ने वाले जयकुमार पोड़ी दल्हा के द रायल विस्डम पब्लिक स्कूल का छात्र है । दोनों बच्चों को पिता बिजेंद्र मौवार और दादा उमा प्रसाद मौवार गले तक बह रहे नाले को पार कर परसाही नाला आते हैं और वहां से स्कूल की वेन से बच्चे स्कूल जाते हैं । पोड़ी दल्हा में आने वाले वार्ड नंबर 18 को धनुवार पारा कहा जाता है और यहां बरसो से लगभग 20-22 परिवार बसे हुए हैं जिनकी संख्या लगभग 70 होगी ये परिवार बरसात में बहुत तकलीफ से रास्ता तय करते हैं । पोड़ी दल्हा में आने वाले इस मोहल्ले में सड़क का अभाव है बताया जा रहा है कि यह धरसा यानि बैलगाड़ी जाने का रास्ता है और बरसात में यह रास्ता कीचड़ से लथपथ हो जाता है इसलिए यहां रहने वाले नाला पार करके परसाही नाला से निकलते हैं । पोड़ी दल्हा सरपंच ने बताया कि दो साल पहले वहां स्टाप डेम की घोषणा हुई थी लेकिन किसी कारणवश वह योजना आगे नहीं बढ़ पाई है और इस मामले में शासन से पत्र व्यवहार कर रहा हूं ।




