छत्तीसगढ़

‘महतारी’ बन गया युवक : आवेदन में खुद को बताया अपना पति, बारह महीने तक पहुँचता रहा पैसा

खैरागढ़। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संचालित महतारी वंदन योजना में खैरागढ़ परियोजना अंतर्गत सत्यापन व्यवस्था की बड़ी चूक सामने आई है। ग्राम मुढ़ीपार के एक पुरुष हितग्राही तिलोक साहू का आवेदन न केवल योजना में दर्ज हो गया, बल्कि ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार आंगनबाड़ी स्तर और सुपरवाइजर स्तर पर भी उसे सत्यापित कर दिया गया। इसके बाद उसके बैंक खाते में लगातार दस महीने तक योजना की राशि पहुंचती रही। हैरानी की बात यह है कि आवेदन में हितग्राही का नाम तिलोक साहू और पति का नाम भी तिलोक साहू ही दर्ज था, इसके बावजूद किसी स्तर पर इस गड़बड़ी को समय रहते नहीं पकड़ा जा सका।

परियोजना अधिकारी बोलीं- रिकवरी कर ली गई, बाकी जानकारी देखकर बताएंगे
परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव ने बताया कि,  संबंधित हितग्राही से रिकवरी कर ली गई है। अन्य जानकारी के संबंध में उन्होंने रिकॉर्ड देखकर जानकारी देने की बात कही। हालांकि, मामला केवल वसूली तक सीमित नहीं है। एक पुरुष का आवेदन महतारी वंदन योजना में कैसे दर्ज हुआ, आंगनबाड़ी और सुपरवाइजर स्तर पर किस आधार पर सत्यापित किया गया, 12 महीने तक भुगतान कैसे जारी रहा और ऑनलाइन रिकॉर्ड व वसूली राशि में अंतर क्यों दिखाई दे रहा है इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी सामने आना बाकी है।

नाम भी तिलोक, पति का नाम भी तिलोक फिर भी दो स्तर पर आवेदन पास
महतारी वंदन योजना के ऑनलाइन रिकॉर्ड में तिलोक साहू का आवेदन पब्लिक द्वारा दर्ज होना बताया गया है। आवेदन खैरागढ़ परियोजना, मुढ़ीपार सेक्टर और संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़ा है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि रिकॉर्ड में आंगनबाड़ी द्वारा जांच की स्थिति ‘सत्यापित’ और सुपरवाइजर द्वारा जांच की स्थिति भी ‘सत्यापित’ दिखाई दे रही है। आवेदन में हितग्राही और पति दोनों का नाम एक ही होने के बावजूद जांच के दोनों स्तरों से आवेदन कैसे पास हो गया, यह विभागीय सत्यापन व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। वर्तमान में आवेदन की स्थिति ‘परमानेंट होल्ड’ और लाम त्याग अनुरोध स्वीकृत दिखाई दे रही है।

रिकॉर्ड में 12 महीने का भुगतान, विभागीय पत्र में केवल 10 हजार की वसूली
मामले में एक और विसंगति सामने आई है। उपलब्ध ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित खाते में 12 महीने की महतारी वंदन योजना की राशि पहुंचने की जानकारी सामने आई है, जबकि एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना खैरागढ़ द्वारा 3 जुलाई 26 को बैंक को जारी पत्र में अपात्र हितग्राही से केवल 10 हजार रुपये शासन के खाते में वापस स्थानांतरित करने के निर्देश दिया गया हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि 12 महीने तक राशि का भुगतान हुआ तो वसूली केवल 10 महीने की राशि की क्यों की गई? शेष भुगतान की स्थिति क्या है, इसका जवाब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

ट्रायल के लिए किया था आवेदन
तिलोक साहू ने बताया कि, वह सीएससी सेंटर संचालित करता है और महतारी वंदन योजना का पोर्टल शुरू होने के शुरुआती दौर में आवेदन की प्रक्रिया समझने एवं ट्रायल के उद्देश्य से उसने स्वयं आवेदन किया था। उसके अनुसार खाते में कुल 10 हजार रुपये की राशि आई थी, जिसके बाद भुगतान बंद हो गया। तिलोक ने बताया कि विभाग द्वारा रिकवरी की कार्रवाई किए जाने के बाद 10 हजार रुपये वापस कर दिया है।

एक साल तक सोता रहा सत्यापन तंत्र
महतारी वंदन योजना में आवेदन की जांच के लिए आंगनबाड़ी और सुपरवाइजर स्तर की व्यवस्था होने के बावजूद एक पुरुष का आवेदन स्वीकृत होकर महीनों तक भुगतान जारी रहना विभागीय निगरानी की गंभीर कमजोरी को उजागर करता है। बड़ा सवाल यह भी है कि यदि मामला सामने नहीं आता तो क्या भुगतान आगे भी जारी रहता? योजना के पात्र हितग्राहियों की जांच करने वाला तंत्र एक पुरुष आवेदक को 12 महीने तक क्यों नहीं पहचान सका और भुगतान रोकने में इतना लंबा समय क्यों लगा, इसकी जवाबदेही तय होना आवश्यक है। केवल राशि वापस लेना ही पर्याप्त कार्रवाई मानी जाएगी या गलत आवेदन के सत्यापन और स्वीकृति में जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई होगी, अब इस पर नजर रहेगी।

Related Articles

Leave a Reply