छत्तीसगढ़

आठवें महीने में ही घर पर दाई ने कराया प्रसव; भारी रक्तस्राव से जच्चा-बच्चा की मौके पर मौत

अंबिकापुर: सरगुजा जिले में मातृ-शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी एक बार फिर महिला और नवजात की जान पर भारी पड़ी। समय पूर्व प्रसव और गंभीर एनीमिया व हाई ब्लड प्रेशर के बावजूद अस्पताल न जाने की लापरवाही के चलते 26 वर्षीय प्रसूता सुखनी मझवार और उसके नवजात की घर पर ही मौत हो गई।मृतका सुखनी मझवार पति दिनेश मझवार लखनपुर ब्लाक के ग्राम सकरिया की रहने वाली थी।

स्वजन के अनुसार सुखनी करीब आठ माह की गर्भवती थी। वह अपने पति के साथ तमिलनाडु में मजदूरी करती थी और 14 जून 2026 को ही गांव लौटी थी। 24 जून 2026 को गांव की मितानिन, सुखनी को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुन्नी पहुंची थी। यहां प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर लगाया गया था।जांच में सुखनी का हीमोग्लोबिन मात्र 6.6 ग्राम और ब्लड प्रेशर 154/113 पाया गया।

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स्थिति गंभीर देख चिकित्सक ने अगले दिन आयरन सुक्रोज चढ़ाने के लिए पीएचसी कुन्नी बुलाया और मेडिकल कालेज अस्पताल अंबिकापुर रेफर करते हुए पर्ची पर स्पष्ट लिखा। मितानिन और चिकित्सक ने महिला को अस्पताल जाने के लिए समझाया भी। मितानिन ने घर आकर भी कई बार अस्पताल जाने की सलाह दी, लेकिन स्वजन ने मना कर दिया। बीते छह जुलाई 2026 को सुबह करीब 9:30 बजे सुखनी का घर पर ही दाई से प्रसव कराया गया। समय पूर्व प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और जटिलताओं के चलते जच्चा-बच्चा दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

पति व स्वजन ने बताया कि प्रसव में अचानक जल्दबाजी हुई और भारी बारिश की वजह से वे अस्पताल नहीं ले जा पाए। चिकित्सकों ने बताया कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी चिन्हित कर ली गई थी। हीमोग्लोबिन सात से कम और बीपी 140/90 से ऊपर होना खतरे का संकेत था। ऐसी स्थिति में संस्थागत प्रसव ही एकमात्र विकल्प था। मितानिन द्वारा लगातार फॉलोअप के बावजूद स्वजन का इंकार जागरूकता की कमी को दर्शाता है।

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सीएमएचओ डा पीएस मार्को ने अपील की है कि गर्भवती महिलाएं हर माह को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत लगने वाले शिविर में अनिवार्य जांच कराएं। हाई रिस्क पाए जाने पर चिकित्सक की सलाह मानकर समय पर जिला अस्पताल या उच्च संस्थान में भर्ती हों। घर पर प्रसव, खासकर हाई रिस्क मामलों में, जानलेवा साबित हो सकता है। तमिलनाडु जैसे राज्यों से लौटने वाले श्रमिक परिवारों की विशेष निगरानी के लिए मितानिन और एएनएम को निर्देश दिए गए हैं।

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