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छत्तीसगढ़

महिला प्रधान आरक्षक की कड़ी पूछताछ के बाद बेहोश होकर गिरा किसान, हुई मौत

अंबिकापुर: ग्राम सुखरी के काला पारा निवासी किसान 65 साल के श्रीराम राजवाड़े और उनकी बहन के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा है. इस विवाद के सिलसिले में 1 जुलाई को गांधीनगर थाने में पदस्थ महिला प्रधान आरक्षक वीणा रानी तिर्की सुखरी गांव पहुंची. जब महिला प्रधान आरक्षक श्रीराम राजवाड़े से पूछताछ कर रही थी तो अचानक ही किसान बेहोश होकर जमीन पर गिर गया. आनन फानन में बुजुर्ग को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. किसान के बेटे ने महिला प्रधान आरक्षक पर भड़कने के कारण हार्ट अटैक आने का आरोप लगाया है.

महिला हेड कॉन्सटेबल पर किसान को धमकाने का आरोप: इस घटना के बाद परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए. किसान के बेटे ने बताया कि महिला प्रधान आरक्षक वीणा रानी तिर्की पूछताछ के दौरान काफी भड़क गई. उन्होंने ये भी कहा कि उनके पिता जब बेहोश हो गए तो बजाय कार्रवाई के पुलिस कर्मी उनका वीडियो बनाने लगे.

मैडम आई थी. हमने कहा शांति से बात कीजिए तो उन्होंने कहा तुम चुप रहो, पिता जी के साथ भी अनाप शनाप बातें करने लगी. इसके बाद पिता जी बेहोश होकर गिर गए. उसके बाद पिता जी को अस्पताल लेकर आए. जहां डॉक्टरों ने कहा कि उनकी मौत हो गई. -मृत किसान का बेटा

कांग्रेस ने किसान की मौत पर दी उग्र आंदोलन की चेतावनी: पूछताछ के दौरान किसान की मौत की खबर लगते ही कांग्रेस सुखरी गांव पहुंच गई. जिला कांग्रेस अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने बताया कि मृतक श्रीराम राजवाड़े गांव के प्रतिष्ठित किसान, लेम्प्स सदस्य, शाला विकास समिति के अध्यक्ष थे. उनका पारिवारिक जमीन विवाद चल रहा था. इसी पूछताछ में महिला आरक्षक ने किसान को धमकाते हुए सवाल जवाब करने लगी जिससे किसान की मौत हो गई. कांग्रेस नेता ने सरगुजा सांसद चिंतामणी महाराज से मामले में कार्रवाई की मांग की, साथ ही दो दिन में जांच पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी.

पुलिस इस तरीके से जमीन विवाद में इतना आगे कैसे बढ़ सकती है. जमीन विवाद कोर्ट का मामला है. मैं अपने सांसद से पूछना चाहता हूं कि सरगुजा में क्या पुलिस गरीब किसानों को धमकाती चमकाती रहेगी.- राकेश गुप्ता, जिला कांग्रेस अध्यक्ष

डॉक्टर से पुलिस को मिली क्लीन चिट: मामले में एडिशन एसपी अमोलक सिंह ढिल्लो का कहना है कि इस मामले में मृतक के घर वालों का बयान लिया गया है. किसान पहले से ही बीमार था. पुलिस अपना काम करने गई थी. डॉक्टर ने भी लिखकर दिया है कि यह नॉन एमएलसी केस है और एक नेचुरल डेथ है.

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