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सोशल मीडिया पर अगर आप हनी ट्रैप हुए तो अब खुद ही पेश करने होंगे अदालत में साक्ष्य! जानें क्यों

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर दोस्ती (Friendship), प्रेम (Love) और धोखाधड़ी (Fraud) का शिकार होने पर अब पीड़ित (Victim) को खुद ही साक्ष्य (Evidence) पेश करने होंगे. दिल्ली स्थित साकेत कोर्ट (Saket court) ने एक पीड़ित युवक की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने एक युवती पर हनी ट्रैप (Honey Trap) कर लाखों रुपये ऐंठने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी. कोर्ट ने युवक की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आप हनी ट्रैप में फंसे हैं या ठगी का शिकार हुए हैं तो आपको उसे खुद ही साबित करना होगा. इसलिए साक्ष्य पेश करने का जिम्मेदारी भी आपकी ही होगी.

दिल्ली के साकेत कोर्ट में एक पीड़ित युवक ने कुछ दिन पहले एक शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत में पीड़ित ने बताया था कि उसकी फेसबुक पर एक युवती से दोस्ती हुई. दोनों में प्रेम का इजहार हुआ. हालांकि, युवती ने युवक को बताया था कि वह शादीशुदा है और उसका पति उसे प्रताड़ित करता है. युवति ने युवक के खर्चे पर दिल्ली में एक इस्टीट्यूट में दाखिल लिया. इस दौरान युवति ने युवक का एक लैपटॉप के साथ तीन लाख रुपये भी लिए.

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हनी ट्रैप, सोशल मीडिया, फेसबुक, हनीट्रैप केस इंडिया, भारत में हनीट्रैप, हनी ट्रैप को दर्ज हो सकती है एफआईआर, दिल्ली पुलिसदिल्ली के साकेत कोर्ट में एक पीड़ित युवक ने कुछ दिन पहले एक शिकायत दर्ज कराई थी.

सोशल साइट्स पर हनी ट्रैप को लेकर कोर्ट ने क्या कहा
कुछ दिनों के बाद जब युवक को युवति पर शक होने लगा तो उसने लैपटॉप मांगा. उस लैपटॉप में युवक ने युवति के व्हाट्सएप्प चैट मिली, जिसमें वह पति के साथ चैट कर रहा था कि युवक से और ज्यादा रकम कैसे ऐंठे. इसके बाद पीड़ित युवक ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया. इसके बाद युवक ने साकेत मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका लगाई. वहां भी स्वीकार नहीं होने पर पीड़ित सत्र अदलात पहुंचा. अब सत्र न्यायालय ने भी साक्ष्य पेश करने के आधार पर मुकदमा दर्ज करने की बात कही है.

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धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं तो साक्ष्य भी खुद देने होंगे
दिल्ली की साकेत कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर हनी ट्रैप का शिकार हो रहे लोगों को खुद ही सावधानी बरतनी चाहिए. अगर आप धोखाधड़ी का शिकार हो गए हैं तो इसको साबित करने के लिए साक्ष्य पेश करने का जिम्मा भी खुद भी उठाएं. हनी ट्रैप, सोशल मीडिया, फेसबुक, हनीट्रैप केस इंडिया, भारत में हनीट्रैप, हनी ट्रैप को दर्ज हो सकती है एफआईआर, दिल्ली पुलिससोशल मीडिया पर अपराधी लोगों को ठगने के लिए नए-नए पैंतरे आजमाते रहते हैं.

सोशल मीडिया पर कितने लोग हनी ट्रैप में फंस रहे हैं
गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर अपराधी लोगों को ठगने के लिए नए-नए पैंतरे आजमाते रहते हैं. दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई हिस्सों में साइबर ठगों का एक गिरोह वर्चुअल हनी ट्रैप के जरिए लोगों को अपना शिकार बना रहा है. इनमें से 20-25 फीसदी लोग ही पुलिस तक शिकायत लेकर पहुंच पाते हैं. जो लोग पहुंचते हैं भी तो उन्हें हनी ट्रैप से संबंधित खुद ही साक्ष्य देने पड़ते हैं.

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गिरोह के सदस्य युवा खासकर पुरुषों को शिकार बना रहे हैं. दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों से लेकर पटना, लखनऊ और भोपाल जैसे शहरों में पुलिस अधिकारी से लेकर आम लोगों तक इस गिरोह के शिकार हो चुके हैं. इस ठग गिरोह में युवतियां भी शामिल होती हैं. गिरोह के सदस्य फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर पहले दोस्ती करते हैं. फिर फेसबुक मैसेंजर के माध्यम से बातचीत कर लोगों को भरोसे में लेकर उनकी फोटो और न्यूड वीडियो रिकॉर्डिंग कर लेते हैं और फिर बाद में रिकॉर्डिंग को वायरल करने की बात कहकर लोगों को ब्लैकमेल करती हैं. उनसे लाखों रुपए मांगे जाते हैं.

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