छत्तीसगढ़

कृष्ण जन्माष्टमी आज : 15 वर्ष पश्चात जयंती योग सहित 7 विशेष संयोग, निशीथ काल पूजन के लिए मिलेंगे मात्र 46 मिनट

रायपुर। इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के मुताबिक इस साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 सितंबर मध्यरात्रि पश्चात 4 सितंबर को रात 2:25 बजे से शुरू हो चुकी है। यह 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी। धार्मिक परंपराओं में जन्माष्टमी की तिथि तय करते समय केवल अष्टमी तिथि को ही आधार नहीं माना जाता, बल्कि मध्यरात्रि के समय और रोहिणी नक्षत्र की स्थिति का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।

 इन्हीं गणनाओं के आधार पर इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा। अर्थात शुक्रवार को मध्यरात्रि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव होगा। पूरे 15 साल बाद ऐसा विशेष योग बन रहा है, जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव ठीक उसी संयोग में मनेगा, जैसा द्वापर युग में उनके जन्म के समय बना था।

श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, कान्हा का प्राकट्य भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि में मध्यरात्रि के समय हुआ था। वर्ष 2026 में जन्माष्टमी पर यही दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग दोबारा घटित हो रहा है, जिसे शास्त्रों में ‘जयंती योग’ कहा गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन जयंती योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, हर्षण योग, हंस योग, मालव्य योग, बुधादित्य राजयोग और नवपंचम राजयोग निर्मित हो रहा है।

जन्माष्टमी की मुख्य पूजा मध्यरात्रि के निशीथ काल में करने की परंपरा है। पंचांग गणना के अनुसार इस दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। जिस समय श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, उस समय रोहिणी नक्षत्र विद्यमान था, इसलिए इसे विशेष माना जाता है। माना जाता है। जन्माष्टमी की पूजा के लिए निशीथ काल सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। निशीथ पूजा का समय लगभग रात 11:58 बजे से 12:44 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के विशेष संयोग में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करना शुभ व फलदायी है। परंपराओं में इस तरह के संयोग में व्रत और पूजा को पापों के क्षय तथा मनोकामना पूर्ति से जोड़ा गया है।

4 सितंबर को दिन की शुरुआत हर्षण योग में होगी, जो दोपहर 3 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। हिंदू धर्म में आस्था का महापर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस बार बेहद खास और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। धार्मिक मान्यताओं में शुभ योगों के दौरान पूजा-पाठ और भगवान का स्मरण करना विशेष फलदायी माना जाता है। राजधानी के इस्कॉन मंदिर, खाटू श्याम मंदिर व राधा-कृष्ण मंदिर में उत्सव व भजन संध्या की शुरुआत शुक्रवार प्रातः काल से हो जाएगी। इसके लिए तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।

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