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कौन है सोनिया गांधी का वो करीबी, जो राहुल गांधी की जगह अमेठी से स्मृति को कर सकता है चैलेंज

रायबरेली

उत्‍तर प्रदेश की रायबरेली और अमेठी सीट पर कांग्रेस किसे टिकट देगी, इस पर सस्‍पेंस बरकरार है. इन दोनों ही लोकसभा सीटों पर पांचवें चरण में चुनाव होना है और नामांकन में बस एक ही दिन बचा है. लंबे समय से ये दोनों ही लोकसभा क्षेत्र नेहरू-गांधी परिवार का गढ़ माने जाने वाली उत्तर प्रदेश की अमेठी और रायबरेली सीटों पर कांग्रेस किसे उम्‍मीदवार बनाएगी, इसका आधिकारिक ऐलान तो नहीं हुआ है, हालांकि चर्चा है कि इन दोनों सीटों पर उम्मीदवारों के नाम करीब-करीब फाइनल कर लिए गए हैं.

सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें हैं कि कांग्रेस रायबरेली से राहुल गांधी को और अमेठी से केएल शर्मा को उम्‍मीदवार बना सकती है. हालांकि रायबरेली से प्रियंका गांधी के नाम पर भी चर्चाएं हैं. जानिए कौन हैं केएल शर्मा जो अमेठी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सांसद स्‍मृति ईरानी को टक्‍कर दे सकते हैं.

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सोनिया गांधी के खास
केएल शर्मा का पूरा नाम किशोरी लाल शर्मा है और वह गांधी परिवार के बेहद खास हैं. साल 2022 में उन्‍होंने यूपी में विधानसभा चुनावों के समय बयान दिया था कि आज जो नेता कांग्रेस पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, उन्‍हें कांग्रेस ने ही तैयार किया है. जब सोनिया गांधी ने चिट्ठी लिखकर रायबरेली से चुनाव न लड़ने का अपना फैसला जनता को बताया था तो उस समय केएल शर्मा ही उनका रुख स्‍पष्‍ट करने के लिए मीडिया से बात कर रहे थे.

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कांग्रेस के विधायक केएल शर्मा ने बुधवार (1 मई 2024) को न्‍यूज एजेंसी एनएनआई से बातचीत में कहा, ‘हमारी अमेठी और रायबरेली में मीटिंग हुई, क्योंकि इन दोनों सीटों से उम्मीदवारी के संबंध में कोई निर्णय नहीं हुआ है. लोग गांधी परिवार से किसी के चुनाव लड़ने की उम्मीद कर रहे हैं और मुझे भी ऐसा ही लगता है. चूंकि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 3 मई है, हमें तैयारी करनी है.’

पार्टी तोड़ेगी परंपरा?
अगर पार्टी केएल शर्मा को टि‍कट देती है तो फिर कांग्रेस दशकों बाद अपने एक पुराने ख्‍याल को आगे बढ़ाती हुई नजर आएगी. सन् 1991 में जब तत्‍कालीन पीएम राजीव गांधी का निधन हुआ तो उस समय अमेठी से गांधी परिवार के बाहर के सदस्य सतीश शर्मा ने चुनाव लड़ा था. उन्‍हें यहां से जीत भी हासिल हुई थी. साल 1998 में सोनिया गांधी ने यहां से चुनाव लड़ा और साल 2004 में राहुल गांधी ने यहीं से अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया. राहुल को पहले ही चुनाव में जीत हासिल हुई थी. साल 2019 तक राहुल यहां से सांसद थे. लेकिन उस साल हुए चुनावों में स्मृति ईरानी ने 55,000 वोटों से हरा दिया था.

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